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Tuesday, 30 April 2024

"देशाटन या भ्रमण से लाभ"




भ्रमण या देशाटन, जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक ऐसी गतिविधि है जो हमें नए जगहों के साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है और हमारे जीवन में नये दृश्यों और अनुभवों का अध्ययन करने का मौका देती है। इसके अतिरिक्त, यह हमें अनेक प्रकार के लाभ प्रदान करता है, जो हमें नई दिशा देने में सहायक होते हैं। इस लेख में, हम देखेंगे कि देशाटन या भ्रमण से हमें कैसे-कैसे लाभ प्राप्त होते हैं।


नई संवाद स्थापित करने का अवसर: भ्रमण या देशाटन हमें नए लोगों से मिलने का मौका देता है और हमें उनके साथ संवाद स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमें नए विचारों और विचारधाराओं से अवगत कराता है और हमारी समझ को विस्तृत करने में मदद करता है।


नए दृश्यों और अनुभवों का अध्ययन: भ्रमण या देशाटन हमें नए दृश्यों और अनुभवों का अध्ययन करने का मौका देता है। यह हमें अनेक विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं, और जीवन शैलियों को समझने का अवसर प्रदान करता है और हमें विश्व के विविधता के प्रति समझाता है।


स्वास्थ्य लाभ: भ्रमण या देशाटन हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। नए जगहों पर घूमने से हमारा मन शांति में रहता है और हमारा तन स्वस्थ रहता है।


शिक्षा का अनुभव: भ्रमण या देशाटन हमें अनेक शिक्षा के अनुभव प्रदान करता है। यह हमें अनेक ऐतिहासिक स्थलों, प्राचीन संस्कृतियों, और विज्ञान के क्षेत्रों के प्रति जागरूक करता है।


सामाजिक विकास: भ्रमण या देशाटन हमें सामाजिक विकास करने का मौका देता है। यह हमें समाज में संचार कौशल, समाज के नियमों और संस्कृतियों के बारे में सीखने का अवसर प्रदान करता है।


रोजगार के अवसर: देशाटन या भ्रमण एक अच्छा रोजगार का स्रोत भी हो सकता है। पर्यटन उद्योग एक बड़ा उद्योग है जो लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है,


 सीमाओं के पार जोड़ता है और अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।


सांस्कृतिक विनिमय: भ्रमण या देशाटन हमें सांस्कृतिक विनिमय का मौका देता है। यह हमें अनेक राज्यों और देशों की विभिन्न संस्कृतियों, भोजनों, और कलाओं को जानने का अवसर प्रदान करता है और हमारी समृद्ध संस्कृति को विकसित करता है।


स्वयं के अनुसंधान: भ्रमण या देशाटन हमें खुद के अनुसंधान करने का अवसर प्रदान करता है। यह हमें अपने आत्मसम्मान और आत्म-समझ को बढ़ाने का मौका देता है और हमें अपने निजी और व्यक्तिगत लक्ष्यों की पहचान करने का संवाद स्थापित करता है।


सांस्कृतिक विश्वासों की समझ: भ्रमण या देशाटन हमें अन्य लोगों के सांस्कृतिक विश्वासों को समझने का अवसर प्रदान करता है। यह हमें समझने में मदद करता है कि अन्य लोग कैसे सोचते हैं और उनकी दृष्टिकोण क्या है।


स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता: भ्रमण या देशाटन हमें स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की भावना प्रदान करता है। यह हमें खुद पर भरोसा करने का और अपने निर्णयों पर आत्म-भरोसा करने का अवसर प्रदान करता है।


संवाद कौशल का विकास: भ्रमण या देशाटन हमारे संवाद कौशल का विकास करता है। यह हमें नए लोगों से संवाद करने की क्षमता प्रदान करता है और हमारे संवाद कौशल को मजबूत बनाता है।


सामर्थ्य और आत्म-विश्वास का विकास: भ्रमण या देशाटन हमें सामर्थ्य और आत्म-विश्वास का विकास करता है। यह हमें नए अनुभवों का सामना करने की क्षमता प्रदान करता है और हमारा सामर्थ्य और आत्म-विश्वास बढ़ाता है।


इस प्रकार, देशाटन या भ्रमण हमें अनेक तरह के लाभ प्रदान करता है, जो हमें नई दिशा और उत्तेजना प्रदान करते हैं। इसलिए, हमें नये स्थानों की खोज करने का और नए अनुभवों का आनंद लेने का मौका हमेशा मिलना चाहिए।

Monday, 31 August 2015

अपनी कमजोरी और ताकत को जाने KNOW YOUR WEAKNESS & STRENGTH


 खुद को समझ लिया तो जग को समझ लिया,
 खुद को जीत लिया समझो सारा जग जीत लिया

इस दुनियाँ मे हर एक व्यक्ति समान क्षमताओं का हो यह संभव नहीं है
I हर एक का व्यक्तित्व भिन्न भिन्न होता हैI एक टीम लीडर के लिए जरूरी है कि वो कमजोरी और ताकत दोनों पक्षों को समझे, जानें और महसूस भी करे I तभी वह मजबूत पक्ष और कमजोरी दोनों का आकलन करने में सक्षम होगा I एक बड़े अभियान का यह एक जरूरी हिस्सा है कि, नायक स्वयं और दूसरों की कमजोरी और मजबूती को समझ कर ही अपनी टीम की कार्यशैली और योजना बना सकता हैI
आखिर कैसे कमजोर और मजबूत पक्ष को हम ढूंढ सकते हैं
?
 यहाँ खोजने के लिए दो पक्ष है :-
प्रथम पक्ष(स्वयं)- खुद की कमजोरियों का चुनाव करें और मजबूत पक्ष चिन्हित करें
    यदि आप निरंतर प्रगति चाहते हैं
, तो यह आवश्यक है कि स्वयं मे बदलाव करने ही होंगे, बिना स्वयं को बदले आप किसी और को बदलने की  न तो नसीहत दे सकते हैं ना ही बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
 स्वयं को बदलने के लिए स्वयं का आकलन जरूरी है, यह आकलन कैसे किया जा सकता है, इसके लिए निम्न चरणों का अनुसरण करें –
1.   एक कॉपी या डायरी लें
2.   अपने व्यक्तित्व के बारे में लिखें
3.   कमजोर और मजबूत पक्ष अलग अलग लिखें
4.   दूसरों से अपने बारे मे पूछें  (FEEDBACK), ध्यान रहे फीडबैक के लिए अलग अलग श्रेणी और सोच के लोगों से मिलें
5.   कमजोर  पक्षों पर रणनीति बनाकर सुधार करें, यदि उनमें सुधार की संभावना नहीं है तो उनको छुपाने का प्रयत्न करें, किन्तु इस कमी के कारण अपने आत्मविश्वास को कम न होनें दें। थोड़े से अभ्यास से आप अपनी कमजोरी को भी मजबूती की तरह प्रस्तुत कर सकते हैं। 
एक वाक़या – एक बार एक सेमिनार मे बहुत से सफल लोग स्टेज पर थे
, उन्हीं में से एक महान लीडर जिनका रंग काफी काला था, वो भी शिरकत कर रहे थे, सबको बारी बारी से बोलना था , जैसे ही इन शक्स की बारी आई, कुछ स्मार्ट और गोरे चिट्टे लोग थोड़ा सा हँस दिये, यह बात इन लीडर साहब ने भाप ली , स्टेज पर पहुंचते ही अभिवादन और परिचय देने के बाद बोला – “यहाँ स्टेज पर बहुत सारे स्मार्ट और गोरे लोग हैं, मेरा व्यवसाय इनसे हमेशा ज्यादा होता है, इसमे इनकी गलती नहीं है , बल्कि ईश्वर ने इनके साथ अन्याय किया है, इन्हे गोरा और स्मार्ट बना दिया, यह लोग रोज अपनी स्मार्टनेस पर थोड़ा ज्यादा ही टाइम खर्च करना इनकी मजबूरी है,जैसे बिना स्नान के यह घर से निकल नहीं सकते, बिना मैंचिंग के कपड़े नहीं पहन सकते, और मुझ पर ईश्वर ने कृपा करके ऐसा रुंग दिया है किया मुझे न ज्यादा सोचना पड़ता है और न ही ज्यादा समय देना होता है, नहाने के बाद और बिना नहाय चमड़ी पर कोई फर्क नहीं पड़ता”।
    उनके इस वक्तव्य से उनकी सकारात्मक विचार ने उनकी एक प्राकृतिक कमजोरी को सकारात्मक ढंग से न केवल छुपा दिया वरन विरोधियों को भी लाजवाब कर दिया।
6.   बहुधा हर किसी का मजबूत पक्ष उसे पता भी होता है, फिर भी लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते है या अनजाने में अनदेखा करते हैं,जबकि  मजबूत पक्ष को निखारने के लिए निरंतर अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
7.   अपने मजबूत पक्ष को जानने के लिए एक संक्षिप्त सर्वे तैयार कीजिये और पुनः कैश बॉक्स यानि टीम से फीडबैक लीजिए।
8.   संस्था के योग्य अधिकारियों  और अपनी टीम के अनुभवी सदस्यों से फीडबैक के लिए संजीदा होकर बात करें।
ध्यान दें
, एक बार फीडबैक लेने के बाद अपनी कमजोरियों और सशक्त पक्ष को जानने के पश्चात यथा अनुसार सुधार करके पुनः फीडबैक लें , यह प्रक्रिया निरंतर चलनी चाहिए क्योंकि सुधार और व्यक्तित्व विकास की कोई सीमा नहीं होती है।एक कहावत के अनुसार  –
“THE BIGGEST ROOM IN THE WORLD IS ROOM OF IMPROVEMENT
 इस निरंतर प्रक्रिया से व्यक्तित्व,ज्ञान और करियर में निखार स्वयं को और आपके सहयोगियों और संस्था, सभी को दिखेगा और आप निरंतर प्रगति के पथ पर परिष्कृत और परिमार्जन के साथ गतिशील रहेंगे ।
दूसरा  पक्ष (टीम)  :-
आपका कैश बॉक्स यानि टीम का भी आकलन  करें, पूरी टीम के साथ बैठक निरंतर करें और उसमें चयन करें, लगातार इस प्रक्रिया को दोहराएँ और फिर देखें, आपको अपनी ही टीम मे कई ऐसे लोग और प्रतिभाएं नज़र आयेंगी। जब आप नज़र डालें तो पाएंगे की बहुत से  कार्य जो कि आप  अकेले कर रहे थे, उसमें साथ और हाथ बटाने के लिए काफी लोग नज़र आएंगे। आप देखेंगे और पायेंगे कि –
·         कोई बेहतर ढंग से मीटिंग के पूर्व स्टेज सजाने मे माहिर मिलेगा
·         कोई न कोई नैसर्गिक मंच व मीटिंग संचालक होगा
·         किसी में लोगो को बुलाने की क्षमता होगी
·         तो कोई टीम के रिकार्ड्स बेहतर ढंग से एकत्र कर सकता है
·         हो सकता है की किसी वरिष्ठ सदस्य की  सिर्फ उपस्थिति से ही टीम उत्साहित होती हो
·         कोई आपके प्रेजेंटशंस की बेहतर डिजायनिंग कर सकता होगा
·         तो कोई ऐसा भी होगा जिसके संपर्क टीम के विस्तार के लिए अहम होंगे
   इस प्रकार प्रत्येक मे कोई न कोई गुण अवश्य होगा
,सिर्फ जरूरत है की उन्हें ढूंढ कर निकालिए और निखारिये। यह आपको और आपके कैश बॉक्स को बेहतर विस्तार देगा अर्थात लाभ द्विगुणित हो जाएगा

सर्वप्रथम, इनकी एक लिस्ट तैयार करें। और क्रमवार आने वाली सभाओं में एक लय बद्ध कार्यक्रम होने लगेंगे। यही प्रक्रिया अन्य फ्रंट पर भी लागू करें।  इस प्रकार स्वयं और टीम कि मजबूती और कमजोरी दोनों को समझ कर सही प्रकार से प्रयोग करने पर परिणाम लाभप्रद होंगे।