Wednesday, 3 February 2021

भारत के गौरव - महारणा प्रताप

 


भारतीय इतिहास के  वीरों की गाथाएँ   सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है । उनसे संबंद्धित कुछ रोचक तथ्य निम्न हैं -
    महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को  राजस्थान के  मेवाड़ के निकट एक गाँव मे हुआ था । प्रताप जैवन्ता बाई और महाराजा उदय सिंह द्वितीय  जी के ज्येष्ठ पुत्र थे। उदय सिंह द्वितीय ने ही उदय पुर की स्थापना की थी ।  महाराणा प्रताप जी एक कुशल योद्धा और समस्त युद्ध कलाओं में प्रवीण थे।  महाराणा 80 किलो का भाला
, दो तलवारें और 72  किलो का कवच सहित 208 किलो का वजन  धारण करते थे।   महाराणा सात फिट और पाँच इंच लंबे थे । महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय घोड़े का नाम 'चेतक' था। चेतक बहुत ही समझदार और स्थिति को पल में ही भांप जाने वाला घोड़ा था। उसने कई मौकों पर महाराणा प्रताप की जान बचाई थी।  मेवाड़ को जीतने के लिए अकबर ने कई प्रयास किए। अकबर चाहता था कि महाराणा प्रताप अन्य राजाओं की तरह उसके कदमों में झुक जाए।

    महाराणा प्रताप ने भी अकबर की अधीनता को  कभी स्वीकार नहीं किया था। अजमेर को अपना केंद्र बनाकर अकबर ने प्रताप के विरुद्ध सैनिक अभियान शुरू कर दिया। महाराणा प्रताप ने कई वर्षों तक मुगलों के सम्राट अकबर की सेना के साथ संघर्ष किया। मेवाड़ की धरती को मुगलों के आतंक से बचाने के लिए महाराणा प्रताप ने वीरता और शौर्य का परिचय दिया।

प्रताप की वीरता ऐसी थी कि उनके दुश्मन भी उनके युद्ध-कौशल के कायल थे। उदारता ऐसी कि दूसरों की पकड़ी गई मुगल बेगमों को सम्मानपूर्वक उनके पास वापस भेज दिया था। इस योद्धा ने साधन सीमित होने पर भी दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाया और जंगल के कंद-मूल खाकर लड़ते रहे। माना जाता है कि इस योद्धा की मृत्यु पर अकबर की आंखें भी नम हो गई थीं। अकबर ने भी कहा था कि देशभक्त हो तो ऐसा हो।
 
महाराणा प्रताप का हल्दी घाटी के युद्ध के बाद का समय पहाड़ों और जंगलों में ही व्यतीत हुआ। अपनी गुरिल्ला युद्ध नीति द्वारा उन्होंने अकबर को कई बार मात दी। महाराणा प्रताप चित्तौड़ छोड़कर जंगलों में रहने लगे। महारानी, सुकुमार राजकुमारी और कुमार घास की रोटियों और जंगल के पोखरों के जल पर ही किसी प्रकार जीवन व्यतीत करने को बाध्य हुए। अरावली की गुफाएं ही अब उनका आवास थीं और शिला ही शैया थी 

 मुगल चाहते थे कि महाराणा प्रताप किसी भी तरह अकबर की अधीनता स्वीकार कर 'दीन-ए-इलाही' धर्म अपना लें। इसके लिए उन्होंने महाराणा प्रताप तक कई प्रलोभन संदेश भी भिजवाए, लेकिन महाराणा प्रताप अपने ‍‍निश्चय पर अडिग रहे। प्रताप राजपूत की आन का वह सम्राट, हिन्दुत्व का वह गौरव-सूर्य इस संकट, त्याग, तप में अडिग रहा। धर्म के लिए, देश के लिए और अपने सम्मान के लिए यह तपस्या वंदनीय है।

कई छोटे राजाओं ने महाराणा प्रताप से अपने राज्य में रहने की गुजारिश की लेकिन मेवाड़ की भूमि को मुगल आधिपत्य से बचाने के लिए महाराणा प्रताप ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक मेवाड़ आजाद नहीं होगा, वे महलों को छोड़ जंगलों में निवास करेंगे। स्वादिष्ट भोजन को त्याग कंद-मूल और फलों से ही पेट भरेंगे, लेकिन अकबर का आधिपत्य कभी स्वीकार नहीं करेंगे। जंगल में रहकर ही महाराणा प्रताप ने भीलों की शक्ति को पहचानकर छापामार युद्ध पद्धति से अनेक बार मुगल सेना को कठिनाइयों में डाला था।

मेवाड़ के गौरव भामाशाह ने महाराणा के चरणों में अपनी समस्त संपत्ति रख दी। भामाशाह ने 20 लाख अशर्फियां और 25 लाख रुपए महाराणा को भेंट में प्रदान किए। महाराणा इस प्रचुर संपत्ति से पुन: सैन्य-संगठन में लग गए। इस अनुपम सहायता से प्रोत्साहित होकर महाराणा ने अपने सैन्य बल का पुनर्गठन किया तथा उनकी सेना में नवजीवन का संचार हुआ। महाराणा प्रताप सिंह ने पुनः कुम्भलगढ़ पर अपना कब्जा स्थापित करते हुए शाही फौजों द्वारा स्थापित थानों और ठिकानों पर अपना आक्रमण जारी रखा!

मुगल बादशाह अकबर ने विक्रम संवत 1635 में एक और विशाल सेना शाहबाज खान के नेतृत्व में मेवाड़ भेजी। इस विशाल सेना ने कुछ स्थानीय मदद के आधार पर वैशाख कृष्ण 12 को कुम्भलगढ़ और केलवाड़ा पर कब्जा कर लिया तथा गोगुन्दा और उदयपुर क्षेत्र में लूट-पाट की। ऐसे में महाराणा प्रताप ने विशाल सेना का मुकाबला जारी रखते हुए अंत में पहाड़ी क्षेत्रों में पनाह लेकर स्वयं को सुरक्षित रखा और चावंड पर पुन: कब्जा प्राप्त किया। शाहबाज खान आखिरकार खाली हाथ पुनः पंजाब में अकबर के पास पहुंच गया। 

चित्तौड़ को छोड़कर महाराणा ने अपने समस्त दुर्गों का शत्रु से पुन: उद्धार कर लिया। उदयपुर को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया। विचलित मुगलिया सेना के घटते प्रभाव और अपनी आत्मशक्ति के बूते महाराणा ने चित्तौड़गढ़ व मांडलगढ़ के अलावा संपूर्ण मेवाड़ पर अपना राज्य पुनः स्थापित कर लिया गया। इसके बाद मुगलों ने कई बार महाराणा प्रताप को चुनौती दी लेकिन मुगलों को मुंह की खानी पड़ी। आखिरकार, युद्ध और शिकार के दौरान लगी चोटों की वजह से महाराणा प्रताप की मृत्यु 29 जनवरी 1597 को चावंड में हुई।

Tuesday, 17 November 2020

चले चलो ....

 

 चले चलो ....



चलते रहना दरिया सा 
रुका हुआ बेमानी है 
बढ़ते चलो चले चलो 
जो ठहरा सो कहानी है 

जीवन चलते रहने का ही पर्याय है , ठहराव मृत्यु का प्रतीक है, अपनी परेशानियों, अक्षमताओं  और परिस्थियों से हार कर हमें रुकना नहीं है , झुकना नहीं है, चलते चलो बढ़े चलो , प्रत्येक असफलता से सीख लेनी है और फिर से चल पड़ना है, प्रत्येक बढ़ता कदम लक्ष्य को और करीब लाएगा, एक लक्ष्य के बाद फिर से चल पड़ना है एक नए सफर पर और नए लक्ष्य की ओर .... क्योंकि 
चलते रहना दरिया सा

रुका हुआ बेमानी है

बढ़ते चलो चले चलो

जो ठहरा सो कहानी है


https://youtu.be/klhWcWcthE8

Thursday, 8 October 2020

UPDATE YOURSELF....

 समय के साथ चलिए वरना ??????


```1998 में Kodak में 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे और वो दुनिया का 85% फ़ोटो पेपर बेचते थे..चंद सालों में ही Digital photography ने उनको बाज़ार से बाहर कर दिया.. Kodak दिवालिया हो गयी और उनके सब कर्मचारी सड़क पे आ गए।


HMT (घडी)

BAJAJ (स्कूटर)

DYNORA (टीवी)

MURPHY (रेडियो)

NOKIA (मोबाइल)

RAJDOOT (बाईक)

AMBASDOR (कार)


मित्रों,

इन सभी की गुणवक्ता में कोई कमी नहीं थी फिर भी बाजार से बाहर हो गए!!

कारण???

उन्होंने समय के साथ बदलाव नहीं किया.!!

आपको अंदाजा है कि आने वाले 10 सालों में दुनिया पूरी तरह बदल जायेगी और आज चलने वाले 70 से 90% उद्योग बंद हो जायेंगे।

चौथी औद्योगिक क्रान्ति में आपका स्वागत है...

Uber सिर्फ एक software है। उनकी अपनी खुद की एक भी Car नहीं इसके बावजूद वो दुनिया की सबसे बड़ी Taxi Company है।

Airbnb दुनिया की सबसे बड़ी Hotel Company है, जब कि उनके पास अपना खुद का एक भी होटल नहीं है।

Paytm, ola cabs , oyo rooms जैसे अनेक उदाहरण हैं।

US में अब युवा वकीलों के लिए कोई काम नहीं बचा है, क्यों कि IBM Watson नामक Software पल भर में ज़्यादा बेहतर Legal Advice दे देता है। अगले 10 साल में US के 90% वकील बेरोजगार हो जायेंगे... जो 10% बचेंगे... वो Super Specialists होंगे।

Watson नामक Software मनुष्य की तुलना में Cancer का Diagnosis 4 गुना ज़्यादा Accuracy से करता है। 2030 तक Computer मनुष्य से ज़्यादा Intelligent हो जाएगा।

अगले 10 सालों में दुनिया भर की सड़कों से 90% cars गायब हो जायेंगी... जो बचेंगी वो या तो Electric Cars होंगी या फिर Hybrid...सडकें खाली होंगी,Petrol की खपत 90% घट जायेगी,सारे अरब देश दिवालिया हो जायेंगे।

आप Uber जैसे एक Software से Car मंगाएंगे और कुछ ही क्षणों में एक Driverless कार आपके दरवाज़े पे खड़ी होगी...उसे यदि आप किसी के साथ शेयर कर लेंगे तो वो ride आपकी Bike से भी सस्ती पड़ेगी।

Cars के Driverless होने के कारण 99% Accidents होने बंद हो जायेंगे.. इस से Car Insurance नामक धन्धा बंद हो जाएगा।

ड्राईवर जैसा कोई रोज़गार धरती पे नहीं बचेगा। जब शहरों और सड़कों से 90% Cars गायब हो जायेंगी, तो Traffic और Parking जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जायेंगी... क्योंकि एक कार आज की 20 Cars के बराबर होगी।

आज से 5 या 10 साल पहले ऐसी कोई ऐसी जगह नहीं होती थी जहां PCO न हो। फिर जब सब की जेब में मोबाइल फोन आ गया, तो PCO बंद होने लगे.. फिर उन सब PCO वालों ने फोन का recharge बेचना शुरू कर दिया। अब तो रिचार्ज भी ऑन लाइन होने लगा है।

आपने कभी ध्यान दिया है..?

आजकल बाज़ार में हर तीसरी दुकान आजकल मोबाइल फोन की है।

sale, service, recharge , accessories, repair, maintenance की।

अब सब Paytm से हो जाता है.. अब तो लोग रेल का टिकट भी अपने फोन से ही बुक कराने लगे हैं.. अब पैसे का लेनदेन भी बदल रहा है.. Currency Note की जगह पहले Plastic Money ने ली और अब Digital हो गया है लेनदेन।

दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है.. आँख कान नाक खुले रखिये वरना आप पीछे छूट जायेंगे..।

समय के साथ बदलने की तैयारी करें।

इसलिए...

व्यक्ति को समयानुसार अपने व्यापार एवं अपने स्वभाव में भी बदलाव करते रहना चाहिये।

 

"Time to Time Update & Upgrade"


समय के साथ चलिये और सफलता पाईये ।```                         

         *🙏🏻🙏🏻🙏🏻*(Copied)

Monday, 20 April 2020

ONLINE MEETINGS ETIQUETTE ( ऑनलाइन मीटिंग्स के सलीके )



 
करोना काल और भविष्य की आवश्यकताओं के आधार पर हमारी हर प्रकार की मीटिंग्स अब काफी समय तक ऑनलाइन अर्थात बिना भीड़ भाड़ के ही होगी। इसका  सीधा प्रभाव रहेगा बीमा क्षेत्र, डाइरैक्ट सेल्लिंग, प्राइवेट वित्तीय संस्थानों, ऑर्गनाइज़ रियल स्टेट और उन सभी व्यवसायों पर जिसमे संस्था को जनसमूह को संबोधित करना होता है। कभी प्रशिक्षण हेतु कभी व्यापार मॉडल का व्याख्यान या फिर अपने सफल सहयोगियों को सम्मानित करने हेतु किए जाने वाले भव्य  सम्मान समारोह हों इन सभी का स्वरूप बदलने वाला है। मोटिवेशनल वक्ताओ के सेमीनार्स और कोचिंग कक्षाएं भी सीधे प्रभावित होंगे। इन परिस्थियों में अपने व्यवसाय को नए तरीके से स्थापित करना होगा। आज इसका विकल्प सिर्फ और सिर्फ ऑनलाइन मीटिंग्स ही देखा जा रहा है। अधिकतर संस्थानों ने इसे अपनाना भी प्रारम्भ कर दिया है। बहुत से लोगों ने इसे अपना भी लिया है और लगातार अपनाना भी प्रारम्भ भी कर दिया है। ऐसे में लोगों को भी ऑनलाइन मीटिंग्स में शामिल होने के तौर तरीके भी सीखने होंगे। ऑनलाइन मीटिंग्स में शामिल होने के लिए निम्न बिन्दुओं को ध्यान रखना जरूरी है -
· 
  •           मीटिंग्स में संजीदा होकर शामिल हों
  •        मीटिंग के विषय की तैयारी पहले से ही रक्खे, मीटिंग में अपने फोन/लैपटाप के माइक्रो फोन को ऑफ रखें , यदि कुछ बोलना है तो पहले हैंड रेज़ विकल्प का प्रयोग करके अनुमति मिलने पर ही अपनी बात रक्खें
  •         मीटिंग में समय पर सम्मिलित हों
  •         अपने उपकरण जैसे, लैपटॉप या मोबाइल को पहले से चार्ज करके रखें
  •         हैड फोन या ईयर फोन की लीड लगा कर मीटिंग शामिल हों
  •         मीटिंग के लिए घर के सबसे शांत स्थान का चयन करें कैमरे के बैक्ग्राउण्ड का भी ध्यान रखें 
  •         परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपने मीटिंग के विषय में संजीदा होकर अवगत करा दें तथा उन्हें मीटिंग के बीच में व्यवधान न करने को बता दें
  •         अपने इंटरनेट कनैक्शन का ध्यान रक्खें
  •         अपनी बारी आने पर ही अपना पक्ष रक्खें
  •         अनुशासन का पालन करें
  •         लैपटाप या मोबाइल के बैक्ग्राउण्ड में चलने वाली अन्य वेबसाइट या एप्स को बंद कर दें।
  •        अपने ड्रेस कोड का भी ध्यान रक्खें
  •         मीटिंग की सूचनाओं को एकत्र करने हेतु डायरी पेन ले कर बैठें
  •         अपने सीनियर का यथोचित सम्मान करें
  •         यदि आप मीटिंग के होस्ट हैं तो स्टार्ट करने से पूर्व मीटिंग का अजेंडा तैयार कर लें। यदि संभव हो तो किसी सक्षम सहयोगी को सभा संचालित करने हेतु नियुक्त करें
  •         समय से ही मीटिंग प्रारम्भ और समाप्त करें
  •         यथा संभव सभी को अपनी बात कहने का अवसर दें।
  •         मीटिंग को क्लोज़ करते समय अजेंडा और सभी सुझावों को दोहरा कर अभिवादन के साथ समाप्त करें। 


Mahendra Srivastastava

Monday, 6 April 2020

संघर्ष और समर्पण का फल

ये पोस्ट सिर्फ बच्चों और युवाओं के लिए हैं! छात्र जीवन में आपके द्वारा की गई मेहनत  से कैसे आपका पूरा जीवन बदल जाता हैं!  श्री आनंद  कुमार (super 30) ने यह कहानी सांझा की, आपसे शेयर कर रहा हूँ! कृपया  पूरी पढ़े  !!

   यह कहानी वाराणसी से निधि झा नाम की लड़की की है। एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की जुझारू बच्ची। दादा साइकिल पर नमकीन बेचते थे । पिता ऑटो रिक्शा चलाते। चाचा ड्राइवरी करते। इन सबसे 15-18 घंटे की मेहनत के बावजूद बस 12 सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण ही हो पाता। रहने तक की जगह नहीं थी। ब्राह्मण होने के नाते एक मंदिर प्रांगण में जगह मिल गई। घर के सब बड़े चाहते थे कि बच्चे पढ़-लिखकर सम्मानजनक काम करें। निधि चार बहनों में से एक है। एक भाई है। पिता सुनील झा की आंखों में बस यही सपना रहा कि बच्चे उनकी तरह अंतहीन संघर्षों से दूर एक सुखद संसार का हिस्सा बनें। यह पढ़ाई से ही संभव था, मगर पढ़ाई संभव नहीं थी।
पहली बार में मिली विफलता
    वह सनातन धर्म इंटर कॉलेज में दाखिल हुई। पुरानी किताबों से पढ़ी। दसवीं पास की तो लगा कि आसमान छू लिया। मंदिर में आने वाले लोग अपनी संतानों के लिए डॉक्टर-इंजीनियर बनने की मन्नत मांगते। निधि ने देखा तो यही सपना उसकी आंखों में बस गया। बिना किसी ट्यूशन और कोचिंग के, सिर्फ पुरानी किताबों की दम पर अकेले निधि घंटों पढ़ती। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा का आवेदन भरा। तैयारी की। मगर कामयाब नहीं हुई। खूब रोई। मजबूरी में सरकारी कॉलेज में बीएससी के लिए आगे बढ़ी। दिल टूटा हुआ था। कुछ भी निश्चित नहीं था। कहीं अखबार से सुपर 30 के प्रोग्राम का पता चला तो एक दिन मेरे सामने खड़ी हुई। वह हमारी टीम और मेरे परिवार का हिस्सा बन गई। मेरी मां को दादी कहती। 14-16 घंटे पढ़ाई में खपी रहती। मां कहती, थोड़ा आराम कर ले। टीवी देख ले। वह कहती, नहीं दादी। इन दोनों कामों के लिए जिंदगी पड़ी है। मगर पढ़ाई सिर्फ अभी ही हो सकती है।
संघर्ष की कहानी पर बनी फिल्म
उन्हीं दिनों फ्रांस के फिल्म मेकर पास्कल प्लिसन पटना आए। सुपर 30 के बच्चों से मिले। उन्हें एक ऐसी कहानी पर फिल्म बनानी थी, जिसमें अथक संघर्ष हो। समर्पण हो। उन्हें निधि के किरदार में यह नजर आया। रिक्शा चलाते पसीने में नहाए पिता, साइिकल पर नमकीन बेचते दादा और ड्राइवर की नौकरी करते चाचा का चेहरा हर समय उसके जेहन में रहता। 20 दिन तक फिल्म की शूटिंग चली। निधि ने आईआईटी की परीक्षा दी। जिस दिन निधि का रिजल्ट आया, उसका परिवार हमारे यहां जुटा था। सबकी नजरें निधि के परिणाम पर थी। वह कामयाब हुई थी। सुनील झा के परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर इतनी खुशियां इसके पहले किसी मौके पर नहीं आई थीं। अब आगे की पढ़ाई के लिए पास्कल ने खर्चे की जिम्मेदारी ली थी। निधि का दाखिला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग धनबाद में हुआ। निधि पर बनी फिल्म का प्रीमियर 2015 में फ्रांस में हुआ। तब निधि और उसके परिवार के साथ-साथ मैं अपने छोटे भाई प्रणव के साथ बतौर खास मेहमान पेरिस में आमंत्रित था। आज निधि एक बहुत ही बड़ी कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रही है |
मैं यहाँ निधि की दो तस्वीर भी पोस्ट कर रहा हूँ | एक तस्वीर सघर्ष के दिनों की है, और दूसरी तस्वीर इंजीनियर बनने के बाद की है!! पैसा और पद इंसान की पूरी  personality बदल देता है!!
यह है हमारे संस्कार धन्य हैं यह बच्ची ,धन्य हैं इसके गुरु ( आनन्द कुमार सुपर 30 ) । मेरी आँखों में आँसू की शुरुआत हो गई हैं इस कहानी को लिख कर। मै एक निवेदन करना चाहता हूँ। अपने सनातनी भाइयों से बंद करो उच्च ,नीच का खेल । हम सब पहले सनातनी हैं यही हमारी पहचान है , यही मेरा धर्म हैं ।  Copied 

Wednesday, 1 April 2020

DREAMS/TARGET ALLOCATION ( लक्ष्य निर्धारण )

 जो लक्ष्य सर्वसुलभ अर्थात आसानी से प्राप्त किया जा सके वह लक्ष्य नहीं होता है , लक्ष्य का अर्थ है कि एक अतिरिक्त प्रयास से उस गन्तव्य पर को प्राप्त करना जोकि अभी हमसे दूर है। जब हम ऐसा प्रयास करते हैं और लक्ष्य प्राप्त करते है तो एक सच्चे विजेता सी भावनाएं जागती हैं, साथ ही साथ हमारी टीम भी हमारे साथ होने में गौरान्वित महसूस करती है, और आपमें अपना हीरो देखने लगती है , आपका अनुकरण कर आप जैसा बनने का प्रयास करती है।  इस प्रकार जब आपकी टीम में लोग आप जैसे बनने लग जाते हैं, आपकी तरह ही कार्य परिणाम देने लगते है और हम अगले स्तर  के लक्ष्य कि ओर बढ़ सकते हैं।
 लक्ष्य निर्धारण से समझने से पूर्व लक्ष्य क्या है, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है।  
लक्ष्य निर्धारण हम कई बार करते हैं, और उनका जम कर प्रचार भी करते हैं, किन्तु जैसे ही कुछ समय बीतता है , हम पुनः एक नया लक्ष्य और नया कार्यक्रम टीम के समक्ष रख देते हैं, इस कृत्य से, हमारा लीडरशिप और टीम के समक्ष प्रभुत्व क्षीण होने लगता है, अतः लक्ष्य निर्धारण बेहद संतुलन और समझदारी के साथ करें। लक्ष्य का निर्धारण करने से पूर्व निम्न बिंदुवों पर एक अभ्यास कर लें –
      ·        लक्ष्य वास्तविक है या नहीं?
·        लक्ष्य का उद्धेश्य क्या है? 
·        लक्ष्य पर आपको खुद विश्वास है या नहीं ?
·        लक्ष्य के समरूप खुद में और टीम में क्षमता है या नहीं?
·        लक्ष्य को प्राप्त करने में लगने वाला समय का मूल्य लक्ष्य के समानुपात में है या नहीं ?
·        लक्ष्य को प्राप्त करने की क्या प्रभावी योजना हो सकती है?
·        प्रथम योजना के साथ बैक-अप योजना क्या है?
·       योजना हेतु संसाधन क्या क्या आवश्यक हैं, और वह उपलब्ध है या नहीं उपरोक्त बिंदुवों      को एक बार विचार में रख कर योजना बनाएँ और तदोपरांत लक्ष्य के लिए प्रयास प्रारम्भ      करना चाहिए।
·     लक्ष्य के लिए समर्पण की भावना होनी चाहिए और आपके समर्पण के साथ टीम का          समर्पण भी आवश्यक है।
·      लक्ष्य केवल व्यग्तिगत लाभ हेतु नहीं निर्धारित होना चाहिए। 

Mahendra Srivastastava

Friday, 20 March 2020

करोना वाइरस - क्या है? कैसे प्रभावित करता है ? बचाव क्या है ? कैसे आज की परिस्थिति से निपटें? आज की परिस्थिति का मानसिक रूप से कैसे सामना करें ?

ऋतु परिवर्तन के साथ ही जीवाणु/ विषाणु सक्रिय होते है, फलस्वरूप बीमारियाँ भी ज्यादा सामने आती हैं ।  हमारी भारतीय संस्कृति के तीज-त्योहार भी ऋतु परिवर्तन के अनुसार ही हैं , होलिका दहन , रंग खेलना , खिचड़ी , लोहड़ी आदि , इन पर्वों से जुड़े   हमारी संस्कृति के कर्मकांड भी साइंटिफिक कारण  जैसे  जगह जगह अग्नि प्रज्ज्वलन आदि , यह सब इन जीवाणुवों के प्रभाव को रोकने का ही तरीका है । किन्तु समय समय पर  इन  सूक्ष्म जीवों की  मारक क्षमताओं  मे भी परिवर्तन होता है ।
    आज हम सबके सामने एक भयावह रूप मे सामने आया है कोरोना वाइरस ।  ऐसा नहीं है कि यह कोई नया वाइरस कही उत्पन्न हुआ है , यह वाइरस फॅमिली है करोना , जिसका यह एक सदस्य कोविड -19 नामित किया गया है, जोकि मूलरूप से चमगादड़ को प्रभावित करता है , वह चीन के वुहान शहर में सर्वप्रथम मनुष्य में आया है। यह वाइरस मनुष्य के श्वसन तंत्र  को  प्रभावित करता है, और इसका प्रभाव फैलता ज्यादा है, प्रारम्भ में गुणित,द्विगुणित और बहुगुणित फैलता है ।    इसी के प्रभाव से हम सब आज इस स्थिति में आ गए हैं।  इस वाइरस का प्रसार हवा में नहीं फैलता है वरन ड्रोप्लेट अर्थात हमारे थूक से फैलता है ।
       इस लेख में मैं उन कॉमन बातों का अधिक उल्लेख नहीं कर रहा हूँ , जो कि समान्यतः आपको न्यूज़ चैनल आदि जगहों पर मिल जाएगा। प्रश्न यह है कि इस स्थिति में हम व्यावहारिक रूप में क्या करें ? कैसे अपने परिवार के साथ वर्ताव करें ?
आज हर घर में अधिकतर लोग न्यूज़ चैनल पर सिर्फ करोना का ही देख रहे हैं
, एक ही विषय की  वार्ता कई - कई चैनलों पर कई - कई घंटों लोग यही न्यूज़ देख रहे है,  सोशल मीडिया पर भी अलग अलग पटल (PLATFORM ) पर केवल और केवल यही सूचना आ रही है ।  इस हालत में , लोग हालात से ज्यादा मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। विषेशरूप से जो लोग शुगर के मरीज है , उन्हे तो वाइरस से ज्यादा तनाव से बचना है , क्योंकि हमारे शरीर में सबसे कमजोर स्ट्रक्चर का एंजाइम इंशुलिन होता है , जोकि सीधे शरीर में शर्करा की मात्रा को बढ़ाता है, यानि तनाव से सीधे शुगर के मरीज को समस्या होगी , इसके साथ ही उनके इर्द -गिर्द परिवार के लोग प्रभावित होंगे । समस्या यहाँ ही होगी , क्योकि वर्तमान हालातों में डॉक्टर भी अतिव्यस्त होंगे और सहायता मिलने में भी असुविधा होगी । लगभग आज यही हालत प्रत्येक परिवार में हैं । तो ऐसे हालातों मे करना क्या चाहिए ? सरकार और स्वास्थ्य विभाग  द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों को  अपनाए  विभिन्न इम्मुनिटी बढ़ाने के आयुर्वेदिक उत्पाद जैसे - तुलसी , गिलोय ,आवला,नीबू आदि का अधिक प्रयोग करें ,   निम्न तरीकों से खुद को और परिवार के सदस्यों को व्यस्त रखें -
  • ·       घर में ही सपरिवार धार्मिक अनुष्ठान करें
  • ·       सपरिवार योग , व्यायाम  आदि करें
  • ·       पारिवारिक इंडोर खेल जैसे अंताक्षरी   आयोजित करें
  • ·       ऑनलाइन पारिवारिक सदस्यों या रिशतेदारों  के साथ गेम खेलें
  • ·       कोई फिल्म आदि लगा कर सपरिवार आनंद लें
  • ·       परिवार के साथ कोई कॉमेडी कार्यक्रम देखें
  • ·       छोटे बच्चों को आर्ट या अन्य एक्टिविटी में व्यस्त करें
  • ·       समय समय पर समाचार देखें किन्तु लगातार न देखें
  • ·       कोई धार्मिक सिरीज़ जैसे - रामायण , महाभारत आदि भी देख सकते हैं ।
  • ·       म्यूजिक के साथ सपरिवार डांस भी कर सकते हैं
  • ·       कैरिओके अन्य एप्प्स पर गाना भी गा सकते हैं
  • ·       ताश/ कैरम शतरंज और लूडो जैसे खेल खेलें

    इस प्रकार अपने अपने परिवार को व्यस्त रख कर आज के हालातों से अपने को और परिवार को   सुरक्षित रक्खें और सबका ख्याल रक्खें । 
Mahendra Srivastastava