Tuesday, 4 May 2021

करोना से कैसे लड़ें -

 

करोना पॉज़िटिव हैं तो क्या करें -
 आज यह लेख तब लिख रहा हूँ
, जबकि कल 04/05/2021 को मेरी  कोविड टेस्ट रिपोर्ट 'नेगेटिव ' जो कि 14/04/2021 को पॉज़िटिव आई थी । विगत लगभग एक पखवारे ने जीवन के लगभग सभी रंग दिखा दिये। इस दौरान लगातार सोशल मीडिया और समाचारों से इस संक्रामण की भयावहता भी दिल मे घर कर रही थी । एक चिंतक और प्रेरक होने के नाते मैंने अपने सर्वप्रथम शांत किया और इस जानलेवा संक्रामण से  कैसे लड़ सकते हैं इसकी योजना बनाई , इसको आज लेख के रूप देने का उद्देश्य है कि  बहुत से लोग मेरे इस अनुभव से लाभ ले सके -
   यदि  आप या आप का कोई संबंधी कोविड पॉज़िटिव हो गया हो तो तुरंत विचलित होने कि आवश्यकता नहीं है।  सर्वप्रथम
, प्रारम्भिक  लक्षणों को देखते है - गले में अजीब सी खराश, हल्का दर्द और सांस फूलना पहले दो दिनों मे लगता है , तीसरे और चौथे दिन बुखार 100 से 101 हो जाता है।  भयावहता प्रारम्भ होती है लगभग चौथे दिन के बाद इसका प्रकोप भयंकर होता है।  इस क्रम मे बस रोगी और तीमारदार को करोना के शरीर में फैलने से तेज़ बचाव के लिए एक्शन लेना होता है। सबसे पहले क्या करें -

·      ईश्वर  को ध्यान करते हुए रोगी को और परिवार के अन्य सदस्य सकारात्मक सोच के साथ एक लड़ाई के लिए अपने को तैयार कर लें । एक आंकड़े के अनुसार 95% कोविड रोगी ठीक हो जाते हैं अर्थात जान का जोख़िम नहीं रहता है , सकारात्मकता से मशतिष्क के न्यूरॉन सकारात्मक दिशा में सक्रिय हो जाते है और रोगी को रोग से लड़ने के लिए तैयार कर देते है , यदि यही सोच में ही नकारत्मकता उल्टा रोगी को परेशानी बढ़ा देती है और साथ ही साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भो लाचार कर देती है । अतः रोगी स्वयं मजबूती से सकारात्मक विचार के साथ अपने शीघ्र स्वस्थ होने का विश्वास रक्खे और तीमारदार और परिवारीजनों को भी विश्वास दिलाए ।

·      सर्वप्रथम रोगी अपने पृथकवास (ISOLATION) को तैयार हो जाएँ । यह नितांत आवश्यक और महत्वपूर्ण कदम है , इस पृथकवास में रोगी को दो कार्य प्रमुख रूप से करने हैं - पहला कोविड से सीधी लड़ाई करनी है और अपना अधिकतम काम खुद से करना है, जी हाँ सारा कार्य खुद करना है। जैसे - अपने कपड़े , अपने प्रयोग किए हुए बर्तन , स्नान आदि । भोजन के बर्तन अलग होने चाहिए , रोगी भोजन लेते समय अपने बर्तन कमरे से बाहर रख कर दूर हट जाए , भोजन या नाश्ता  देने के बाद परिवारी जन आवाज लगा कर दूर हट जाएँ , अब रोगी उस भोजन को उठा कर गृहन कर सकते हैं । यदि किसी कारण जैसे वृद्धावस्था आदि के कारण अगर अपना काम करने मे अक्षम है तो तीमारदार बहुत सावधानी से , जैसे रोगी के पास जाते समय डबल मास्क (प्रस्तावित और प्रमाणित ) और दस्ताने पहन कर जाएँ , रोगी के कपड़े बर्तन आदि एक बड़े टब मे डाल कर सोडियम हाइपो सल्फेट या अन्य प्रमाणित वाइरस रोधी रसायन में गरम पानी  में डाल दें । 10- 15 मिनट के बाद ही अच्छे डिटर्जेंट से धोएँ । रोगी का कमरा भी समय समय पर सैनिटाइज़ करते रहें और संभव हो तो रोगी स्वयं करे । रोगी को भी किसी तीमारदार के आसपास होने पर मास्क अवश्य पहनें ।

·      अब कोविड रोग से लड़ने कि तैयारी करनी है, सर्वप्रथम आपके पास एक ओक्सी मीटर और डिजिटल थर्मामीटर तथा स्टीम लेने का उपकरण   होना आवश्यक है। प्रति  तीन घंटे पर ऑक्सिजन लेवेल और शरीर का तापमान नापते रहें। ऑक्सिजन लेवेल दुरुस्त रहे तो रोगी 75% लड़ाई यहीं जीत जाते हैं । ऑक्सिजन लेवेल को दुरुस्त रखने के लिए आप देशी पोटली - लौंग , अजवाइन और कपूर का भी प्रयोग कर सकते हैं।   जितने ज्यादा बार हो सके स्टीम लेते रहें , आप चाहें तो स्टीम उपकरण में पानी के साथ तुलसी अर्क का भी प्रयोग कर सकते हैं । एक बार में कम से कम 10 मिनट तक भाप अवश्य ले । 

·      अगला कदम है , चिकित्सीय सहायता लेना , जहां तक संभव हो घर पर रह कर ही उपचार लें , यह आपके और टीमदारों दोनों के लिए अत्यंत सुगम है।  चिकत्सक आपको वह चुनना है जो कि आपको ऑनलाइन और जब आवश्यकता हो तुरंत संपर्क करने पर आपको सलाह दे । यह भी आवशयक है  कि वह कोविड मरीजों को देखने का अनुभव रखते हों , उनके निरदेशानुसार तुरंत औषधियाँ लेना प्रारम्भ कर दें । इस कदम से आप लगभग सुरक्षित कि श्रेणी में आ जाते हैं ।

·      भोजन - बिलकुल भी खाली पेट न रहें , घर का बना सुपाच्य और हल्के तेल मसाले का भोजन करें और अधिक से अधिक पनि पिए , जितना ज्यादा हो सके और चिकित्सक कि राय लेकर पानी में ORS या एलेक्ट्राल मिला लें । नारियल पानी , सब्जियों का सूप , दाल  का पानी और दूध मे हल्दी का सेवन अवश्य करें ।

·      दिनचर्या - ज्यादा से ज्यादा आराम करें , भरपूर नींद लें । अपनी रुचि के अनुसार संगीत सुनना, पसंदीदा फिल्म देखना , ईश्वर भजन सुनना आदि जारी रख सकते हैं । लेकिन उतना ही जितने  से आपको  शारीरिक कष्ट न हो उतना मनोरंजन करें । अनुलोम - विलोम सबसे आसान प्राणायाम है , यह तीन - चार - पाँच बार जितना हो सके दिन में अवश्य करें , इससे आपका ऑक्सिजन लेवेल सही रहेगा तथा अन्य आसान जैसे - कपाल भाति, अर्ध कपालभाती , उज्जई आदि करते रहें , संभव हो तो सुबह शाम खुले मे टहले अन्यथा अपने कमरे मे ही टहल सकते है । खुले में टहलते समय रोगी ने मास्क अवश्य पहना होना चाहिए और आस पास कम से कम 6 फीट कि दूरी पर रहें मास्क और सैनिटाइज़र का प्रयोग करते रहें ।

·      मनोदशा - अंत में रोगी और परिवारिजनों कि मनोदशा का बहुत बड़ा रोल होता है इस संक्रमण  के समय। अब रोग अगर आ ही गया तो उससे रोगी को लड़ना ही है चाहे हंस के लड़े या फिर रो रो कर, मर्ज़ी है आपकी और जीवन है आपका

   अंत मे मेरी शुभकामनाए आप सभी के साथ है , ईश्वर  हम सभी को इस प्रकोप से बचाए। मैं कोई चिकित्सक नहीं हूँ, अपने डॉक्टर से संपर्क मे रहें और 100 % उनका अनुसरण करें  - हाँ एक चिंतक , प्रेरक और अभी अभी मैं  इस संक्रमण से बाहर आया हूँ , इस लिए यह लेख लिखा ताकि जरूरतमन्द लोगों को शायद मैं प्रेरित कर सकूँ । यदि आप मे से कोई भी चाहे तो व्हाट्स अप या कॉल कर के मुझसे सलाह ले सकते है। 

 आपका

 महेंद्र श्रीवास्तव

 09918800522/09335928449 

                                     

Monday, 8 March 2021

मीटिंग या इवैंट कैसे प्रमोट करें ?


किसी भी नेटवर्क आधारित व्यापार के लिए किए जाने वाले कार्यक्रम का सपूर्ण लाभ लेने में  बहुधा अधिकांश लोग सक्षम नहीं होते हैं, इसका सीधा कारण जानकारी का अभाव या फिर किए जाने वाले कार्य के प्रति सम्पूर्ण निष्ठा और समर्पण की कमी होता है। लेकिन अधिकतर लोग केवल सही कार्य पद्धति अर्थात कैसे किसी इवैंट को अपने लिए कैसे सार्थक किया जाता है, यह जानकारी ही नहीं रखते हैं, इसी कारण से बार बार अच्छे अवसर होने के बावजूद अपनी टीम को बहुत बड़ा नहीं कर पाते हैं और सफलता से वंचित रह जाते हैं।    यदि आपके साथ भी अक्सर ऐसा हो रहा है तो निम्न बिन्दुवों को अपनी कार्य शैली में सम्मिलित करें और अपनी सफलता सुनिश्चित करें -

·       इवेंट मे आप होस्ट ( स्वागती  ) बन कर सम्मिलित हों नाकि गेस्ट (आगंतुक ) बन कर

·       इवेंट से पूर्व अपने संभावित ग्राहकों (prospect) की सूची बना लें ।

·       संभावित ग्राहक यदि आस पास के हैं तो स्वयं मिलकर या दूर के हैं तो विडियो कॉल माध्यम से आमंत्रित करें ।

·       अपने अतिथियों को आपके इस संस्था से जुडने का कारण स्पष्ट रूप से बताएं , यह भी बताएं कि आपकी संस्था दूसरों से किस प्रकार अलग है।

·       अपने संभावित ग्राहकों के आम जीवन से जुड़ी आर्थिक समस्याओं को ध्यान पूर्वक सुनें और उन्हे यह आश्वस्त करें कि उनकी समस्याओं का समाधान आपके साथ आपकी संस्था से जुड़ कर ही हो सकता है।

·       प्रत्येक से सीधे मिलकर संजीदा होकर अपनी संस्था और उससे होने वाले लाभ की संक्षिप्त विवरण साझा करें । सम्पूर्ण ज्ञान देने से बचें , सिर्फ विशेषताओ का उल्लेख करें ।

·       इवैंट आपके लिए बहुत अधिक  महत्वपूर्ण है यह अहसास करें और अपने परिवार को भी इसके प्रति संजीदा कर दें और अपने संभावित ग्राहकों (प्रोस्पेक्ट ) को भी इवैंट कि महत्वत्ता का अहसास करा दें ।

·       ईवेंट में जीवंत होकर सम्मिलित रहें , अपने मेहमानों का गर्मजोशी से स्वागत करें ।

·       अपने गेस्ट को अहसास कराएं कि आप अपनी संस्था के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।

·       इवैंट चाहे ऑनलाइन हो या ऑफलाइन  आपके लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है ।

·       इवैंट की तैयारी अर्थात लोगों को आमंत्रित करना  पहले से करते रहें, और इवेंट के दिन प्रातः काल से ही लोगों को फोन कॉल से रिमाइंडर देते रहें।

·       इवैंट में सदैव समय से उपस्थित रहें । यदि कार्यक्रम ऑनलाइन है तो विडियो ऑन करके प्रसन्नचित मुद्रा में रहें ।

·       इवैंट चाहे ऑफलाइन हो या ऑनलाइनआपकी वेषभूषा और सकारात्मक उपस्थिति टीम को उत्साहित करती है।

·       इवैंट के बाद सभी से फोन कॉल और व्यक्तिगत माध्यम से फॉलो अप करें , सही प्रकार से सही समय पर किया गया फॉलो अप से ही संभावित ग्राहक आपके लिए व्यापार में परिवर्तित होता है ।
सनद रहे कि इवेंट में आपके और आपकी टीम के अधिक से अधिक संख्या ही आपके नेटवर्क व्यापार कि सफलता का आधार होता है, आपके व्यक्तिगत गेस्ट अधिक होने से आप अपनी टीम के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। आशा है आप उपरोक्त लेख का अनुसरण करके अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने में सफल रहेंगे ।

   
 


Wednesday, 3 February 2021

भारत के गौरव - महारणा प्रताप

 


भारतीय इतिहास के  वीरों की गाथाएँ   सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है । उनसे संबंद्धित कुछ रोचक तथ्य निम्न हैं -
    महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को  राजस्थान के  मेवाड़ के निकट एक गाँव मे हुआ था । प्रताप जैवन्ता बाई और महाराजा उदय सिंह द्वितीय  जी के ज्येष्ठ पुत्र थे। उदय सिंह द्वितीय ने ही उदय पुर की स्थापना की थी ।  महाराणा प्रताप जी एक कुशल योद्धा और समस्त युद्ध कलाओं में प्रवीण थे।  महाराणा 80 किलो का भाला
, दो तलवारें और 72  किलो का कवच सहित 208 किलो का वजन  धारण करते थे।   महाराणा सात फिट और पाँच इंच लंबे थे । महाराणा प्रताप के सबसे प्रिय घोड़े का नाम 'चेतक' था। चेतक बहुत ही समझदार और स्थिति को पल में ही भांप जाने वाला घोड़ा था। उसने कई मौकों पर महाराणा प्रताप की जान बचाई थी।  मेवाड़ को जीतने के लिए अकबर ने कई प्रयास किए। अकबर चाहता था कि महाराणा प्रताप अन्य राजाओं की तरह उसके कदमों में झुक जाए।

    महाराणा प्रताप ने भी अकबर की अधीनता को  कभी स्वीकार नहीं किया था। अजमेर को अपना केंद्र बनाकर अकबर ने प्रताप के विरुद्ध सैनिक अभियान शुरू कर दिया। महाराणा प्रताप ने कई वर्षों तक मुगलों के सम्राट अकबर की सेना के साथ संघर्ष किया। मेवाड़ की धरती को मुगलों के आतंक से बचाने के लिए महाराणा प्रताप ने वीरता और शौर्य का परिचय दिया।

प्रताप की वीरता ऐसी थी कि उनके दुश्मन भी उनके युद्ध-कौशल के कायल थे। उदारता ऐसी कि दूसरों की पकड़ी गई मुगल बेगमों को सम्मानपूर्वक उनके पास वापस भेज दिया था। इस योद्धा ने साधन सीमित होने पर भी दुश्मन के सामने सिर नहीं झुकाया और जंगल के कंद-मूल खाकर लड़ते रहे। माना जाता है कि इस योद्धा की मृत्यु पर अकबर की आंखें भी नम हो गई थीं। अकबर ने भी कहा था कि देशभक्त हो तो ऐसा हो।
 
महाराणा प्रताप का हल्दी घाटी के युद्ध के बाद का समय पहाड़ों और जंगलों में ही व्यतीत हुआ। अपनी गुरिल्ला युद्ध नीति द्वारा उन्होंने अकबर को कई बार मात दी। महाराणा प्रताप चित्तौड़ छोड़कर जंगलों में रहने लगे। महारानी, सुकुमार राजकुमारी और कुमार घास की रोटियों और जंगल के पोखरों के जल पर ही किसी प्रकार जीवन व्यतीत करने को बाध्य हुए। अरावली की गुफाएं ही अब उनका आवास थीं और शिला ही शैया थी 

 मुगल चाहते थे कि महाराणा प्रताप किसी भी तरह अकबर की अधीनता स्वीकार कर 'दीन-ए-इलाही' धर्म अपना लें। इसके लिए उन्होंने महाराणा प्रताप तक कई प्रलोभन संदेश भी भिजवाए, लेकिन महाराणा प्रताप अपने ‍‍निश्चय पर अडिग रहे। प्रताप राजपूत की आन का वह सम्राट, हिन्दुत्व का वह गौरव-सूर्य इस संकट, त्याग, तप में अडिग रहा। धर्म के लिए, देश के लिए और अपने सम्मान के लिए यह तपस्या वंदनीय है।

कई छोटे राजाओं ने महाराणा प्रताप से अपने राज्य में रहने की गुजारिश की लेकिन मेवाड़ की भूमि को मुगल आधिपत्य से बचाने के लिए महाराणा प्रताप ने प्रतिज्ञा की थी कि जब तक मेवाड़ आजाद नहीं होगा, वे महलों को छोड़ जंगलों में निवास करेंगे। स्वादिष्ट भोजन को त्याग कंद-मूल और फलों से ही पेट भरेंगे, लेकिन अकबर का आधिपत्य कभी स्वीकार नहीं करेंगे। जंगल में रहकर ही महाराणा प्रताप ने भीलों की शक्ति को पहचानकर छापामार युद्ध पद्धति से अनेक बार मुगल सेना को कठिनाइयों में डाला था।

मेवाड़ के गौरव भामाशाह ने महाराणा के चरणों में अपनी समस्त संपत्ति रख दी। भामाशाह ने 20 लाख अशर्फियां और 25 लाख रुपए महाराणा को भेंट में प्रदान किए। महाराणा इस प्रचुर संपत्ति से पुन: सैन्य-संगठन में लग गए। इस अनुपम सहायता से प्रोत्साहित होकर महाराणा ने अपने सैन्य बल का पुनर्गठन किया तथा उनकी सेना में नवजीवन का संचार हुआ। महाराणा प्रताप सिंह ने पुनः कुम्भलगढ़ पर अपना कब्जा स्थापित करते हुए शाही फौजों द्वारा स्थापित थानों और ठिकानों पर अपना आक्रमण जारी रखा!

मुगल बादशाह अकबर ने विक्रम संवत 1635 में एक और विशाल सेना शाहबाज खान के नेतृत्व में मेवाड़ भेजी। इस विशाल सेना ने कुछ स्थानीय मदद के आधार पर वैशाख कृष्ण 12 को कुम्भलगढ़ और केलवाड़ा पर कब्जा कर लिया तथा गोगुन्दा और उदयपुर क्षेत्र में लूट-पाट की। ऐसे में महाराणा प्रताप ने विशाल सेना का मुकाबला जारी रखते हुए अंत में पहाड़ी क्षेत्रों में पनाह लेकर स्वयं को सुरक्षित रखा और चावंड पर पुन: कब्जा प्राप्त किया। शाहबाज खान आखिरकार खाली हाथ पुनः पंजाब में अकबर के पास पहुंच गया। 

चित्तौड़ को छोड़कर महाराणा ने अपने समस्त दुर्गों का शत्रु से पुन: उद्धार कर लिया। उदयपुर को उन्होंने अपनी राजधानी बनाया। विचलित मुगलिया सेना के घटते प्रभाव और अपनी आत्मशक्ति के बूते महाराणा ने चित्तौड़गढ़ व मांडलगढ़ के अलावा संपूर्ण मेवाड़ पर अपना राज्य पुनः स्थापित कर लिया गया। इसके बाद मुगलों ने कई बार महाराणा प्रताप को चुनौती दी लेकिन मुगलों को मुंह की खानी पड़ी। आखिरकार, युद्ध और शिकार के दौरान लगी चोटों की वजह से महाराणा प्रताप की मृत्यु 29 जनवरी 1597 को चावंड में हुई।

Tuesday, 17 November 2020

चले चलो ....

 

 चले चलो ....



चलते रहना दरिया सा 
रुका हुआ बेमानी है 
बढ़ते चलो चले चलो 
जो ठहरा सो कहानी है 

जीवन चलते रहने का ही पर्याय है , ठहराव मृत्यु का प्रतीक है, अपनी परेशानियों, अक्षमताओं  और परिस्थियों से हार कर हमें रुकना नहीं है , झुकना नहीं है, चलते चलो बढ़े चलो , प्रत्येक असफलता से सीख लेनी है और फिर से चल पड़ना है, प्रत्येक बढ़ता कदम लक्ष्य को और करीब लाएगा, एक लक्ष्य के बाद फिर से चल पड़ना है एक नए सफर पर और नए लक्ष्य की ओर .... क्योंकि 
चलते रहना दरिया सा

रुका हुआ बेमानी है

बढ़ते चलो चले चलो

जो ठहरा सो कहानी है


https://youtu.be/klhWcWcthE8

Thursday, 8 October 2020

UPDATE YOURSELF....

 समय के साथ चलिए वरना ??????


```1998 में Kodak में 1,70,000 कर्मचारी काम करते थे और वो दुनिया का 85% फ़ोटो पेपर बेचते थे..चंद सालों में ही Digital photography ने उनको बाज़ार से बाहर कर दिया.. Kodak दिवालिया हो गयी और उनके सब कर्मचारी सड़क पे आ गए।


HMT (घडी)

BAJAJ (स्कूटर)

DYNORA (टीवी)

MURPHY (रेडियो)

NOKIA (मोबाइल)

RAJDOOT (बाईक)

AMBASDOR (कार)


मित्रों,

इन सभी की गुणवक्ता में कोई कमी नहीं थी फिर भी बाजार से बाहर हो गए!!

कारण???

उन्होंने समय के साथ बदलाव नहीं किया.!!

आपको अंदाजा है कि आने वाले 10 सालों में दुनिया पूरी तरह बदल जायेगी और आज चलने वाले 70 से 90% उद्योग बंद हो जायेंगे।

चौथी औद्योगिक क्रान्ति में आपका स्वागत है...

Uber सिर्फ एक software है। उनकी अपनी खुद की एक भी Car नहीं इसके बावजूद वो दुनिया की सबसे बड़ी Taxi Company है।

Airbnb दुनिया की सबसे बड़ी Hotel Company है, जब कि उनके पास अपना खुद का एक भी होटल नहीं है।

Paytm, ola cabs , oyo rooms जैसे अनेक उदाहरण हैं।

US में अब युवा वकीलों के लिए कोई काम नहीं बचा है, क्यों कि IBM Watson नामक Software पल भर में ज़्यादा बेहतर Legal Advice दे देता है। अगले 10 साल में US के 90% वकील बेरोजगार हो जायेंगे... जो 10% बचेंगे... वो Super Specialists होंगे।

Watson नामक Software मनुष्य की तुलना में Cancer का Diagnosis 4 गुना ज़्यादा Accuracy से करता है। 2030 तक Computer मनुष्य से ज़्यादा Intelligent हो जाएगा।

अगले 10 सालों में दुनिया भर की सड़कों से 90% cars गायब हो जायेंगी... जो बचेंगी वो या तो Electric Cars होंगी या फिर Hybrid...सडकें खाली होंगी,Petrol की खपत 90% घट जायेगी,सारे अरब देश दिवालिया हो जायेंगे।

आप Uber जैसे एक Software से Car मंगाएंगे और कुछ ही क्षणों में एक Driverless कार आपके दरवाज़े पे खड़ी होगी...उसे यदि आप किसी के साथ शेयर कर लेंगे तो वो ride आपकी Bike से भी सस्ती पड़ेगी।

Cars के Driverless होने के कारण 99% Accidents होने बंद हो जायेंगे.. इस से Car Insurance नामक धन्धा बंद हो जाएगा।

ड्राईवर जैसा कोई रोज़गार धरती पे नहीं बचेगा। जब शहरों और सड़कों से 90% Cars गायब हो जायेंगी, तो Traffic और Parking जैसी समस्याएं स्वतः समाप्त हो जायेंगी... क्योंकि एक कार आज की 20 Cars के बराबर होगी।

आज से 5 या 10 साल पहले ऐसी कोई ऐसी जगह नहीं होती थी जहां PCO न हो। फिर जब सब की जेब में मोबाइल फोन आ गया, तो PCO बंद होने लगे.. फिर उन सब PCO वालों ने फोन का recharge बेचना शुरू कर दिया। अब तो रिचार्ज भी ऑन लाइन होने लगा है।

आपने कभी ध्यान दिया है..?

आजकल बाज़ार में हर तीसरी दुकान आजकल मोबाइल फोन की है।

sale, service, recharge , accessories, repair, maintenance की।

अब सब Paytm से हो जाता है.. अब तो लोग रेल का टिकट भी अपने फोन से ही बुक कराने लगे हैं.. अब पैसे का लेनदेन भी बदल रहा है.. Currency Note की जगह पहले Plastic Money ने ली और अब Digital हो गया है लेनदेन।

दुनिया बहुत तेज़ी से बदल रही है.. आँख कान नाक खुले रखिये वरना आप पीछे छूट जायेंगे..।

समय के साथ बदलने की तैयारी करें।

इसलिए...

व्यक्ति को समयानुसार अपने व्यापार एवं अपने स्वभाव में भी बदलाव करते रहना चाहिये।

 

"Time to Time Update & Upgrade"


समय के साथ चलिये और सफलता पाईये ।```                         

         *🙏🏻🙏🏻🙏🏻*(Copied)

Monday, 20 April 2020

ONLINE MEETINGS ETIQUETTE ( ऑनलाइन मीटिंग्स के सलीके )



 
करोना काल और भविष्य की आवश्यकताओं के आधार पर हमारी हर प्रकार की मीटिंग्स अब काफी समय तक ऑनलाइन अर्थात बिना भीड़ भाड़ के ही होगी। इसका  सीधा प्रभाव रहेगा बीमा क्षेत्र, डाइरैक्ट सेल्लिंग, प्राइवेट वित्तीय संस्थानों, ऑर्गनाइज़ रियल स्टेट और उन सभी व्यवसायों पर जिसमे संस्था को जनसमूह को संबोधित करना होता है। कभी प्रशिक्षण हेतु कभी व्यापार मॉडल का व्याख्यान या फिर अपने सफल सहयोगियों को सम्मानित करने हेतु किए जाने वाले भव्य  सम्मान समारोह हों इन सभी का स्वरूप बदलने वाला है। मोटिवेशनल वक्ताओ के सेमीनार्स और कोचिंग कक्षाएं भी सीधे प्रभावित होंगे। इन परिस्थियों में अपने व्यवसाय को नए तरीके से स्थापित करना होगा। आज इसका विकल्प सिर्फ और सिर्फ ऑनलाइन मीटिंग्स ही देखा जा रहा है। अधिकतर संस्थानों ने इसे अपनाना भी प्रारम्भ कर दिया है। बहुत से लोगों ने इसे अपना भी लिया है और लगातार अपनाना भी प्रारम्भ भी कर दिया है। ऐसे में लोगों को भी ऑनलाइन मीटिंग्स में शामिल होने के तौर तरीके भी सीखने होंगे। ऑनलाइन मीटिंग्स में शामिल होने के लिए निम्न बिन्दुओं को ध्यान रखना जरूरी है -
· 
  •           मीटिंग्स में संजीदा होकर शामिल हों
  •        मीटिंग के विषय की तैयारी पहले से ही रक्खे, मीटिंग में अपने फोन/लैपटाप के माइक्रो फोन को ऑफ रखें , यदि कुछ बोलना है तो पहले हैंड रेज़ विकल्प का प्रयोग करके अनुमति मिलने पर ही अपनी बात रक्खें
  •         मीटिंग में समय पर सम्मिलित हों
  •         अपने उपकरण जैसे, लैपटॉप या मोबाइल को पहले से चार्ज करके रखें
  •         हैड फोन या ईयर फोन की लीड लगा कर मीटिंग शामिल हों
  •         मीटिंग के लिए घर के सबसे शांत स्थान का चयन करें कैमरे के बैक्ग्राउण्ड का भी ध्यान रखें 
  •         परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपने मीटिंग के विषय में संजीदा होकर अवगत करा दें तथा उन्हें मीटिंग के बीच में व्यवधान न करने को बता दें
  •         अपने इंटरनेट कनैक्शन का ध्यान रक्खें
  •         अपनी बारी आने पर ही अपना पक्ष रक्खें
  •         अनुशासन का पालन करें
  •         लैपटाप या मोबाइल के बैक्ग्राउण्ड में चलने वाली अन्य वेबसाइट या एप्स को बंद कर दें।
  •        अपने ड्रेस कोड का भी ध्यान रक्खें
  •         मीटिंग की सूचनाओं को एकत्र करने हेतु डायरी पेन ले कर बैठें
  •         अपने सीनियर का यथोचित सम्मान करें
  •         यदि आप मीटिंग के होस्ट हैं तो स्टार्ट करने से पूर्व मीटिंग का अजेंडा तैयार कर लें। यदि संभव हो तो किसी सक्षम सहयोगी को सभा संचालित करने हेतु नियुक्त करें
  •         समय से ही मीटिंग प्रारम्भ और समाप्त करें
  •         यथा संभव सभी को अपनी बात कहने का अवसर दें।
  •         मीटिंग को क्लोज़ करते समय अजेंडा और सभी सुझावों को दोहरा कर अभिवादन के साथ समाप्त करें। 


Mahendra Srivastastava

Monday, 6 April 2020

संघर्ष और समर्पण का फल

ये पोस्ट सिर्फ बच्चों और युवाओं के लिए हैं! छात्र जीवन में आपके द्वारा की गई मेहनत  से कैसे आपका पूरा जीवन बदल जाता हैं!  श्री आनंद  कुमार (super 30) ने यह कहानी सांझा की, आपसे शेयर कर रहा हूँ! कृपया  पूरी पढ़े  !!

   यह कहानी वाराणसी से निधि झा नाम की लड़की की है। एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की जुझारू बच्ची। दादा साइकिल पर नमकीन बेचते थे । पिता ऑटो रिक्शा चलाते। चाचा ड्राइवरी करते। इन सबसे 15-18 घंटे की मेहनत के बावजूद बस 12 सदस्यों के परिवार का भरण-पोषण ही हो पाता। रहने तक की जगह नहीं थी। ब्राह्मण होने के नाते एक मंदिर प्रांगण में जगह मिल गई। घर के सब बड़े चाहते थे कि बच्चे पढ़-लिखकर सम्मानजनक काम करें। निधि चार बहनों में से एक है। एक भाई है। पिता सुनील झा की आंखों में बस यही सपना रहा कि बच्चे उनकी तरह अंतहीन संघर्षों से दूर एक सुखद संसार का हिस्सा बनें। यह पढ़ाई से ही संभव था, मगर पढ़ाई संभव नहीं थी।
पहली बार में मिली विफलता
    वह सनातन धर्म इंटर कॉलेज में दाखिल हुई। पुरानी किताबों से पढ़ी। दसवीं पास की तो लगा कि आसमान छू लिया। मंदिर में आने वाले लोग अपनी संतानों के लिए डॉक्टर-इंजीनियर बनने की मन्नत मांगते। निधि ने देखा तो यही सपना उसकी आंखों में बस गया। बिना किसी ट्यूशन और कोचिंग के, सिर्फ पुरानी किताबों की दम पर अकेले निधि घंटों पढ़ती। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा का आवेदन भरा। तैयारी की। मगर कामयाब नहीं हुई। खूब रोई। मजबूरी में सरकारी कॉलेज में बीएससी के लिए आगे बढ़ी। दिल टूटा हुआ था। कुछ भी निश्चित नहीं था। कहीं अखबार से सुपर 30 के प्रोग्राम का पता चला तो एक दिन मेरे सामने खड़ी हुई। वह हमारी टीम और मेरे परिवार का हिस्सा बन गई। मेरी मां को दादी कहती। 14-16 घंटे पढ़ाई में खपी रहती। मां कहती, थोड़ा आराम कर ले। टीवी देख ले। वह कहती, नहीं दादी। इन दोनों कामों के लिए जिंदगी पड़ी है। मगर पढ़ाई सिर्फ अभी ही हो सकती है।
संघर्ष की कहानी पर बनी फिल्म
उन्हीं दिनों फ्रांस के फिल्म मेकर पास्कल प्लिसन पटना आए। सुपर 30 के बच्चों से मिले। उन्हें एक ऐसी कहानी पर फिल्म बनानी थी, जिसमें अथक संघर्ष हो। समर्पण हो। उन्हें निधि के किरदार में यह नजर आया। रिक्शा चलाते पसीने में नहाए पिता, साइिकल पर नमकीन बेचते दादा और ड्राइवर की नौकरी करते चाचा का चेहरा हर समय उसके जेहन में रहता। 20 दिन तक फिल्म की शूटिंग चली। निधि ने आईआईटी की परीक्षा दी। जिस दिन निधि का रिजल्ट आया, उसका परिवार हमारे यहां जुटा था। सबकी नजरें निधि के परिणाम पर थी। वह कामयाब हुई थी। सुनील झा के परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर इतनी खुशियां इसके पहले किसी मौके पर नहीं आई थीं। अब आगे की पढ़ाई के लिए पास्कल ने खर्चे की जिम्मेदारी ली थी। निधि का दाखिला इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग धनबाद में हुआ। निधि पर बनी फिल्म का प्रीमियर 2015 में फ्रांस में हुआ। तब निधि और उसके परिवार के साथ-साथ मैं अपने छोटे भाई प्रणव के साथ बतौर खास मेहमान पेरिस में आमंत्रित था। आज निधि एक बहुत ही बड़ी कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रही है |
मैं यहाँ निधि की दो तस्वीर भी पोस्ट कर रहा हूँ | एक तस्वीर सघर्ष के दिनों की है, और दूसरी तस्वीर इंजीनियर बनने के बाद की है!! पैसा और पद इंसान की पूरी  personality बदल देता है!!
यह है हमारे संस्कार धन्य हैं यह बच्ची ,धन्य हैं इसके गुरु ( आनन्द कुमार सुपर 30 ) । मेरी आँखों में आँसू की शुरुआत हो गई हैं इस कहानी को लिख कर। मै एक निवेदन करना चाहता हूँ। अपने सनातनी भाइयों से बंद करो उच्च ,नीच का खेल । हम सब पहले सनातनी हैं यही हमारी पहचान है , यही मेरा धर्म हैं ।  Copied